तेजस्वीता + तपस्वीता + तत्परता = पुष्टि युवा. _________गो.हरिराय..

Tuesday, December 29, 2009

पुरुषार्थी है वही संसार में उन्नति करता है...


संसार में भाग्य के भरोसे बैठने वाले व्यक्ति ज्यादा है। जबकि भगवान ने सबको कर्म करने का अधिकार दिया है। अच्छे कर्म कर हमें अपने जीवन को सुधारने की दिशा में कदम बढाना चाहिए। यदि हम यूं ही जीवन भर रोते रहेंगे तो सफल नहीं हो पाएंगे। जिस व्यक्ति के अंदर उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम विराजमान है। उस व्यक्ति का भाग्य भी फलित होता है और उसे दैविक शक्तियों का सहारा आशीर्वाद के रूप में मिलता है। जो व्यक्ति पुरुषार्थी है वही संसार में उन्नति करता है और वही सफल होता है। आलस्य और प्रमाद से किसी की उन्नति नहीं होती न ही वहां भाग्य फलता है। भाग्य वही फलता है जहां उद्यमी पुरुष होते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि आज बेईमान और छली-प्रपंची लोग ज्यादा फल-फूल रहे हैं और ईमानदार वहीं का वहीं है। लेकिन वे लोग कभी यह देखने की कोशिश नहीं करते कि बेईमान अपनी बेईमानी के बल पर ही उन्नति नहीं कर रहा है बल्कि वह उसके लिए पुरुषार्थ करता है। जबकि एक ईमानदार व्यक्ति केवल अपनी ईमानदारी के गुण को लेकर बैठा है और पुरुषार्थ नही करता है। यानी वह आलसी है इसलिए उसकी उन्नति रुकी हुई है। आज अगर दुनिया में किसी चीज की कमी है तो वह है मेहनती लोगों की। आज के दौर में हर इंसान कामचोर बनता जा रहा है। जबकि विपरीत हालातों में भी अगर आप हिम्मत करके खडे हैं और पुरुषार्थ करने के लिए तत्पर हैं तो सफलता निश्चित ही प्राप्त कर सकते हैं। इन हालात में भाग्य भी आपका साथ देगा और परमात्मा का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा। जहां पर सभी आलसी व भाग्यवादी हो जाते हैं वहां कलह, द्वंद,क्लेश व अशांति का साम्राज्य होता है। इसके विपरीत जहां पर पुरुषार्थी होते हैं वहां भाग्य फलता है और वहीं उन्नति होती है। समस्त दैविक शक्तियां भी उसी की सहायता करती है। इसके लिए मनुष्य को केवल अपने अंदर की शक्तियां को पहचानने व उन्हें जाग्रत करने की आवश्यकता है।

No comments:

Post a Comment